भूमगादी घोटाला..

भूमगादी घोटाला..

भूमगादी घोटाला


जिला पंचायत की जांच में हुए कई और खुलासे
कंपनी के सीईओ और लेखापाल ने मिलकर किया घोटाला
एक डायरेक्टर के संलिप्त होने की भी खबर
भेजे जा रहे नोटिस लिए जा रहे जवाब
एक सप्ताह की मोहलत और बीत गए डेढ़ महीने
अब तक नहीं हुई एफआईआर दर्ज

देवशरण तिवारी


जगदलपुर।सरकारी पैसों से चल रही भूमगादी कंपनी में हुए लाखों के घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद हुई जांच में इस कंपनी के तात्कालिक मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीनानाथ राजपूत और वर्तमान लेखापाल महेश राव को दोषी पाया गया है।इन दोनों ने मिलकर कंपनी के लाखों रुपये अपने निजी खातों मे और लाखों रुपये अपने दोस्तों और रिश्तेदारों  के खातों में ट्रांसफर किये हैं और इसके अलावा व्यापारियों से माल खरीदने और बेचने की प्रक्रिया में भो लाखों की हेराफेरी की गई है।मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा इन दोनों को बीते 25 अप्रेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसमें एक सप्ताह का समय देते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने और संतोषजनक जवाब न दिए जाने पर उन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की बात लिखी गई थी लेकिन आज डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी घोटालेबाजों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

इधर इस कंपनी की एक महिला डायरेक्टर के भी इस घोटाले में संलिप्त होने की खबर है।बस्तर विकास खंड में विभिन्न महिला स्वसहायता समूहों की अगुआई कर रही यह महिला इन घोटले बाजों की राज़दार होने के साथ इस लूट से हासिल की गई रकम में भी हिस्सेदार बताई जा रही है।घोटाले की एक बड़ी रकम इस महिला और इसके रिश्तेदारों के खातों में भी ट्रांसफर की गई है। एक तरफ इस कंपनी के सीईओ को इस कंपनी के माध्यम से  बस्तर की 5000 महिलाओं को लखपति बनाने के झूठे दावों के चलते  देश का प्रतिष्ठित रोहिणी नैयर पुरस्कार दिया गया है साथ ही यूपीएससी के मॉडल प्रश्नपत्रों में इनकी उपलब्धियों पर आधारित सवाल परीक्षार्थियों से हल करवाये जा रहे हैं दूसरी तरफ जिले के जिम्मेदार अधिकारियों का  इन पर कार्रवाही करने से बचना कई और नए सवाल खड़े कर रहा है।

भ्रष्टाचार का राष्ट्रीय पुरस्कार !



भूमगादी कंपनी के सीईओ दीनानाथ राजपूत भूमगादी कंपनी के माध्यम से बस्तर की 5000 आदिवासी  महिलाओं को लखपति बनाने की उपलब्धि हासिल करने के बाद नई दिल्ली में देश का प्रतिष्ठित रोहिणी नैयर पुरुस्कार प्राप्त करते हुए.





जिला पंचायत बस्तर की जांच में स्पष्ट हो चुका है कि डीपीआर के अनुसार कंपनी की समस्त गतिविधियों का संचालन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के प्रस्ताव और अनुमोदन के आधार पर नहीं किया गया।क्लस्टर स्तर पर क्रय की गई सामग्री का कोई भी लिखित साक्ष्य कार्यालय में नहीं पाया गया।खरीदी केंद्रों से सामग्री किस-किस व्यापारी को कितनी कितनी मात्रा में बेची गयी यह हिसाब भी मौके से गायब है।कंपनी का लेखा संधारण विधिवत नहीं किया गया।चेक जारी पंजी का संधारण नहीं किया गया।संस्था के डीपीआर में संस्था को दी गयी कुल राशि 4.4 करोड़ रुपये का 4.7 प्रतिशत अर्थात 20.68 लाख रुपये प्रशासनिक मद में खर्च किया जाना था परंतु 48 लाख रुपये खर्च कर दिए गए और अतिरिक्त खर्च के व्यय का कोई हिसाब संस्था में नही पाया गया।भूमगादी का बैंक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा के किलेपाल शाखा में संधारित होने के कारण लेखापाल द्वारा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर  से कोरे चेक में पहले से हस्ताक्षर करवाये गए थे एवं चेक जारी होने के उपरांत उन्हें कोई जानकारी नही दी गई।दिनाँक 14.08.2020 को पाटन छत्तीसगढ़ निवासी डोमेन्द्र महिपाल के खाते में 3 लाख रुपये हस्तांतरित किये गए लेकिन इस राशि से संबंधित कोई बिल वाउचर संस्थान में नहीं पाया गया।इसी तरह आशीष पदमवार नामक व्यक्ति के खाते में दिनाँक 30.03.2022 को 163000 रुपये हस्तांतरित किये गए इसका भी कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नही कराया गया।अज़हर खान के खाते में दिनाँक 05.01.2022 को 60000 रुपये ट्रांसफर किये गए और उसके बिल वाउचर भी गायब हैं।मरकबा इलेवेंटिव लाइव्स नामक फर्म को दिनाँक 16.02.2022,01.06.2022 तथा 01.07.2022 को कुल 254742 रुपये दिए गए जिसके बिल वाउचर भी अप्राप्त हैं।नारी शक्ति ग्राम संगठन तुरांगुर,ज्योति महिला ग्राम संगठन तथा महात्मा गांधी ग्राम संगठन से कुल 245000 रुपये खाते में प्राप्त कर राशि से खान इंजीनियरिंग भिलाई को सेनेटरी पेड की खरीदी के नाम से भुगतान किया गया लेकिन ये सामग्री प्राप्त ही नहीं हुई।समुन्नति फाइनेंस चेन्नई से 6043045 रुपये ऋण के रूप में कब और क्यों लिए गए इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं है।

इसी तरह बिहान संकुल संगठन द्वारा 17 लाख रुपये का ऋण लिया जाना बताया जा रहा है जिसे जांच प्रतिवेदन में संदिग्ध बताया गया है।इसी तरह 12 लाख रुपये में खरीदे गए जूट बैग की ख़रीदी भी संदेहों के दायरे में है।कई फर्मों से बोगस खरीदी और कई फर्मों को की गई बोगस बिक्री का भी मामला सामने आया है।जिन्हें बिल काटे गए हैं उनसे बिलों में उल्लेखित राशि से काफी कम राशि का प्राप्त होना बताया गया है।अधिकतर भुगतान नगद में करना बताया गया है और कई वाउचर्स को संस्था के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा अभिप्रमाणित नहीं किया गया है।ज़्यादातर खरीदी के बिलों में प्रोपराइटर के हस्ताक्षर भी नहीं पाए गए हैं।जांच में पाया गया कि लेखापाल द्वारा सीईओ के साथ मिलकर कंपनी को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।कई व्यक्तिगत खातों में भी बड़ी रकम हस्तांतरित की गई है।बैंक स्टेटमेंट में यह भी उजागर हुआ है कि लेखपाल द्वारा स्वयं के बचत खाते में 4034488 रुपये ट्रांसफर करवाये गए हैं। लेखापाल द्वारा अपनी पत्नी और अन्य परिजनों के खाते में 1065787 रुपये ट्रांसफर किये जाने की भी पुष्टि हुई है।लेखापाल द्वारा स्वयं के  एक अन्य खाते एचडीएफसी बैंक में भी 395525 रुपये भूमगादी के खाते से ट्रांसफर किये गए हैं।लेखापाल द्वारा 1506848 एवं 2.5 लाख रुपये लोन के रूप में लेना बताया गया है जिसमे से सिर्फ 160326 रुपये वापस करना बताया गया है। तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीनानाथ राजपूत द्वारा अपने व्यक्तिगत खाते में कंपनी के 946000 रुपये ट्रांसफर करवाये जाने की भी पुष्टि हो चुकी है।मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा 23.04.2024 को जारी नोटिस के माध्यम से इन सभी अनियमितताओं पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीनानाथ राजपूत और लेखापाल महेश राव से स्पष्टीकरण मांगते हुए सात दिवस की मोहलत दी गई थी और एफआईआर दर्ज करवाने  की चेतावनी दी गई थी परंतु आज दिनाँक तक इन दोनों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।इसके साथ ही इस कंपनी की सतत निगरानी करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों की थी लेकिन इन अधिकारियों पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं कि गई है।खबर ये भी है कि इस विभाग में बरसों से पदस्थ कुछ अधिकारी दोषियों को बचाने का भरपूर प्रयास करते देखे जा रहे हैं।