छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता खरीदी का सरकारी सिस्टम हुआ फेल
ओड़िशा के तस्करों के लिए वन विभाग ने खोल दिए सारे बैरियर

छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता खरीदी का सरकारी सिस्टम हुआ फेल
आदिवासी आधी कीमत पर पत्ता बेचने मजबूर
ओड़िशा के तस्करों के लिए वन विभाग ने खोल दिए सारे बैरियर
अफसरों के सामने दिन रात हो रही पत्तों की तस्करी
रॉयल्टी और बोनस का हो रहा बड़ा नुकसान
जगदलपुर (हाईवे चैनल )एक तरफ आदिवासियों को तेन्दू पत्ते से मलामाल कर देने के सरकारी दावे हैँ दूसरी तरफ कहानी बिलकुल उलट है जिसमे बॉर्डर के उस पार के तस्कर छत्तीसगढ़ को मिलने वाली रॉयल्टी के साथ हमारे प्रदेश के आदिवासियों को मिलने वाले बोनस पर भी डाका डाल रहे हैँ। मामला सुकमा वनमंडल का है जहाँ तेन्दू पत्ते की निर्धारित लक्ष्य से आधे की भी खरीदी नहीं हो सकी है और हज़ारों बोरा तेन्दु पत्ता तेलंगाना और ओड़िशा पहुँच चुका है। दोरनापाल से लेकर कोंटा तक दर्जनों अघोषित फड़ों के माध्यम से ये तस्कर पत्तों की खरीदी कर रहे हैं ।
सुकमा वनमंडल के फड़ों में खरीदी ठप पड़ी है।पैसों की कमीऔर भुगतान की जटिल प्रक्रिया के चलते आदिवासियों का इस सरकारी व्यवस्था से मोह भंग हो चुका है। सरकारी फड़ों में क्वालिटी का बहाना बनाकर संग्राहकों को परेशान किया जा रहा है जिसकी वजह से स्थानीय आदिवासी तेंदु पत्ता के संग्रहण में ख़ास रूचि नहीं ले रहे है और जो संग्रहण कर भी रहे हैं वे नकद पैसों की लालच में पड़ोसी राज्यों के बिचौलियों को कम कीमत पर पत्ता बेच रहे हैं ।

हालात यह हैं कि सुकमा वनमंडल से दिन-रात दो पहिया वाहनों के माध्यम से हरा पत्ता ओड़िशा पहुँचाया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारी छत्तीसगढ़ की ध्वस्त हो चुकी खरीदी की सरकारी व्यवस्था को स्वीकार कर चुके हैं और बेबस होकर रोज़ाना लाखों रुपये का तेंदुपत्ता अपने सामने से ओड़िशा की तरफ जाते देख रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी डरे हुए हैं क्यों कि यदि इसे रोका तो उनपर खरीदी का दबाव बढ़ेगा। इसलिए बिना किसी रोक टोक के रोज़ाना हज़ारों बोरा तेंदुपत्ता ओड़िशा जाने दिया जा रहा है। यह अलग बात है कि इस पूरे घटनाक्रम से छत्तीसगढ़ सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी का नुकसान तो होगा ही साथ ही इसके बोनस की राशि भी बस्तर के आदिवासियों को नहीं मिल सकेगी।दक्षिण सुकमा के कोंटा जगरगुण्डा इलाके का आधे से अधिक पत्ता इस बार तोड़ा ही नहीं गया है जबकि इस इलाके के पत्तों को देश का सर्वश्रेष्ठ किस्म का पत्ता मना जाता है। छत्तीसगढ़ के वन विभाग की इस लचर व्यवस्था का भरपूर लाभ उठाने पड़ोसी राज्यों के व्यापारी मैदान में कूद गए हैं।

बड़ी संख्या में उस पार के ग्रामीण इधर के जंगलों में अपने लोगों से संग्रहण करवा रहे हैं और बिना सुखाए हरे पत्ते बोरों में भरकर ओड़िशा के मलकानगिरी ले जा रहे हैं, जहाँ बड़े तेंदुपत्ता व्यापारी ओड़िशा के पत्तों के साथ छत्तीसगढ़ का पत्ता भी खरीद रहे हैं। शबरी नदी के उस पार पहुँचते ही यह पत्ता ओड़िशा का हो जाता है और जो रॉयल्टी छत्तीसगढ़ शासन के सरकारी खजाने में जाती वह ओड़िसा सरकार के खजाने में जा रही है। ओड़िशा में तेंदुपत्ते की खरीदी पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है। ओड़िशा में तेन्दुपत्ता के खुले बाजार और नगद भुगतान की व्यस्था के चलते जैसे आंधी चल रही है और बेहद तेजी से यहाँ का पत्ता ओड़िशा की तरफ उड़ा चला जा रहा है और इसी आंधी के चलते छत्तीसगढ़ शासन की तेंदुपत्ता नीति मिट्टी में मिलती नज़र आ रही है।

राजनीतिक फायदे के लिए सरकार कर रही आदिवासियों का नुकसान – मनीष कुंजाम
कोंटा के पूर्व विधायक और वरिष्ठ आदिवासी नेता मनीष कुंजाम ने कहा कि सरकारें वोट की लालच में तेंदुपत्ता की कीमतें तो बढ़ा रही हैं लेकिन खरीदने के समय असलियत सामने आ जाती है। इस बार भी जान बूझकर खरीदी नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि ओड़िशा और महाराष्ट्र की तरह यहाँ भी तेंदुपत्ता खरीदी और बिक्री की ज़िम्मेदारी पंचायतों के सुपुर्द कर दी जानी चाहिए।पेसा कानून के तहत ग्रामसभा के नियंत्रण में पत्ते की खरीदी की जायेगी तभी आदिवासियों को इसका पूरा लाभ मिल सकेगा।
तस्करी रोकने के इंतज़ाम किये जा रहे हैं -मुख्य वनसंरक्षक
जगदलपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक अलोक तिवारी ने स्वीकार किया कि दो पहिया वाहनों से तस्करी की जा रही है। उन्होंने कहा कि उड़नदस्तों को ज़िम्मेदारी दी जा रही है कई जाँच दलों का भी गठन किया जा रहा है जो बॉर्डर एरिया की निगरानी करेंगे।





