इंद्रावती टायगर रिजर्व के जंगलों में चल रहा तेन्दूपत्ते का बड़ा कारोबार
व्यापारियों की दिन रात आवाजाही से यहां का वन्य जीवन संकट में

इंद्रावती टायगर रिजर्व के जंगलों में चल रहा तेन्दूपत्ते का बड़ा कारोबार
तेलंगाना और महाराष्ट्र के व्यापारियों ने पार किया करोड़ों का हरा सोना
बेहिसाब मुनाफे में टायगर रिजर्व के अधिकारीयों की भी हिस्सेदारी
टाइगर रिजर्व और अभ्यारंण्यों के लिए बने नियमों की उड़ रही धज्जियां
विभाग के कर्मचारी भी फड़ लगाकर खरीद रहे तेन्दुपत्ता

देवशरण तिवारी
जगदलपुर /बीजापुर (हाईवे चैनल )बस्तर संभाग में अगर कहीं थोड़ा बहुत वन्यजीवन बचा है तो वह जगह है इंद्रावती टायगर रिजर्व लेकिन यहां भी शिकारियों और लकड़ी तस्करों की गतिविधियां तेज़ हो चुकी है। पहले इस पूरे इलाके पर माओवादियों का कब्ज़ा था। अब नक्सलवादियों के खात्मे के बाद यहाँ माफियाओँ की गतिविधियां बहुत तेजी से बढ़ती जा रही हैं। फिलहाल एक और बड़ी चुनौती यहाँ सक्रिय तेन्दूपत्ता माफिया हैं जो गैर कानूनी रूप से यहां तेन्दूपत्ता तुड़वा रहे हैं। टायगर रिजर्व के एक बड़े क्षेत्र में तेन्दूपत्ते के कारोबार से वन्य प्राणियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। टायगर रिजर्व का सेंड्रा और फरसेगढ़ रेंज तेलंगाना और महाराष्ट्र के तेन्दूपत्ता माफियाओं के कब्ज़े में हैं ।

इधर टायगर रिजर्व का भारी भरकम अमला सब कुछ जानते हुए भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। यहां के सेंड्रा और फरसेगढ़ के कोर रेंज में दिन रात इन व्यापारियों के डीज़ल से चलने वाले वाहन शोर मचाते दौड़ रहे हैं। किसी राष्ट्रीय उद्यान, टायगर रिजर्व और अभ्यारण्य की जैव विविधता और वन्य जीवन को सुरक्षित बनाये रखने के लिए बेहद कड़े नियम बनाये गए हैं लेकिन यहाँ के अधिकारियों का इन नियमों से कोई लेना देना नहीं है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि इन इलाकों में ख़ुद टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों ने ही अपने अपने फड़ खोल लिए हैं। यहाँ के , चेर पल्ली, रालापल्ली, जारागुड़ा, पंदीवाया, चीपनपल्ली, मुसदुसा, आरापल्ली, ईरपागुट्टा,सेंड्रा,गुंडसापुरी,पालसेगुंडी,गरतुल और कोकेरा गावों में बड़े पैमाने पर तेन्दूपत्ते की खरीदी की जा रही है। कुछ स्थानों पर पत्ते सुखाए जा रहे हैं और कहीं कहीं से हरे पत्तों को इंद्रावती के उस पार महाराष्ट्र की सीमा में पहुँचाया जा रहा है। कई व्यापारियों द्वारा पिल्लूर की तरफ से भोपालपटनम होते हुए तेलंगाना के पातागुड़म तक यहाँ के पत्ते ले जाए जा रहे हैं।

बेचने के लिए बोरों में भर कर तेन्दूपत्ता ले जा रहे कुछ युवकों ने बताया कि ग्राम एडापल्ली के कांतैया तलाण्डी और सेंड्रा के राजेंद्र वासम द्वारा मुख्य रूप से खरीदी की जा रही है। इनके द्वारा खरीदा गया पत्ता राजनांदगाव के मनोज जैन द्वारा बॉर्डर के उस पार ले जाया जा रहा है। सेंड्रा के आस पास का पत्ता इंद्रावती नदी के उस पार महाराष्ट्र भेजा जा रहा है।यहां के पत्तों की खरीदी श्याम सुन्दर रेड्डी द्वारा की जा रही है। टाइगर रिजर्व के एक वन रक्षक तुलसीराम गुमड़ी जैसे कई वन कर्मियों के भी नाम सामने आये हैं जो स्वयं ही इस इलाके में फड़ लगाकर ग्रामीणों से तेन्दूपत्ता तुड़वाने में लगे हुए हैं।
रेंजर ने कहा जानकारी नहीं.
नेशनल टायगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के आर्थिक सहयोग से 100 से अधिक पेट्रोलिंग गार्ड इंद्रावती टायगर रिजर्व में जिस तरह कागज़ी तौर पर साल भर तैनात रहते हैं उसी तरह यहाँ के नियमित अधिकारी और कर्मचारी भी कभी कभार फील्ड में दिखाई पड़ते है। सेंड्रा परिक्षेत्र के रेंजर चन्द्रसेन बघेल से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने आईटीआर में तेन्दूपत्ता तस्करी की बात से अनभिज्ञता ज़ाहिर की साथ ही यह भी कहा कि यदि ऐसा है तो नियमतः कार्रवाई की जाएगी ।




