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टायगर रिज़र्व के अधिकारियों का अत्याचार

नक्सलियों के साथ मिलकर किया एक बेवा की ज़मीन पर कब्ज़ा

वन विभाग के अधिकारियों ने छीन ली एक विधवा आदिवासी की ज़मीन.

नक्सालियों के साथ आये, धमकाया और किया कब्ज़ा.

जंगल छोड़ पट्टे की ज़मीन पर खोद दिया “कैम्पा ” का तालाब.

इंद्रावती टायगर रिज़र्व के अधिकारीयों का एक और कारनामा.

 

बीजापुर से लौटकर

देवशरण तिवारी

जगदलपुर (हाईवे चैनल) बस्तर संभाग के बीजापुर का एक बड़ा इलाका दशकों से नक्सलवाद के खौफनाक साये में जीता आया है। लम्बे समय तक इन इलाकों में रहने वाले लोग पुलिस और माओवादियों के बीच चली लम्बी लड़ाई के दौरान दो पाटों के बीच पिसते रहे हैं। तमाम शहरी सुख सुविधाओं से मीलों दूर इनकी ज़िन्दगी थोड़ी बहुत खेती किसानी और कुछ वनोपज संग्रहण के सहारे धीरे धीरे आगे सरक रही है। सरकारी योजनाओं का भी पूरा लाभ इन्हें अब तक नहीं मिल पाया है। अपनी कमज़ोरियों को छुपाने प्रशासन वर्षों से नक्सली आतंक का बहाना बनाता आया है। जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, राशन आदि से सम्बंधित विभाग इस खौफ के सहारे ज़िम्मेदारियों से बचते आये हैं वहीं एक ऐसा विभाग भी है जिसने दो कदम और आगे बढ़ते हुए नक्सालियों के साथ मिलकर एक आदिवासी परिवार के खेत पर ही अपना कब्ज़ा जमा लिया है। जिसके चलते यह परिवार अपने ही पट्टे की ज़मीन पर खेती नहीं कर पा रहा है।पिछले चार सालों से यह परिवार अपनी ज़मीन को वापस पाने की उम्मीद में इस विभाग के छोटे बड़े सभी अधिकारियों के सामने जाकर मिन्नतें कर रहा है लेकिन ये अफसर माओवादियों से कम निर्दयी नहीं है और इन गरीबों की खेती की ज़मीन छोड़ने तैयार नहीं हैं।

 

पीड़िता एसम वीरे बाई,निवासी काण्डलापर्ती बीजापुर छत्तीसगढ़

बीजापुर जिले के भोपालपटनम इलाके के जंगलों से निकल कर आई यह खबर बेहद हैरान करने वाली है। यहाँ रहने वाली एक आदिवासी बेवा के साथ जो हुआ है उसे जानकार आप ये समझ जायेंगे कि बस्तर जैसे पिछड़े इलाके में सिर्फ माओवादियों ने ही नहीं बल्कि सरकारी अफसरों ने भी भोलेभाले आदिवासियों पर किस कदर जुल्म ढाया है। ये कहानी है एसम वीरेबाई की जिनके पति किस्टैया का आज से दस वर्ष पहले देहांत हो चुका है। फिलहाल बड़ी मुश्किलों में वे अपने बच्चों के साथ जीवन यापन कर रही हैं।भोपालपटनम के ग्राम पंचायत बड़े काकलेड़ के काण्डलापर्ती गाँव में यह गोंड आदिवासी परिवार कई  पीढ़ियों से रहता आया है।इनके पति और उनके भाई समैया के नाम पर पास ही के बिबरी गाँव में  6 एकड़ ज़मीन है। भोपालपटनम तहसील के पटवारी हल्का नंबर 00004 के खसरा नंबर 55,56,68 और 78/5 के अनुसार इनकी और इनके बच्चों के नाम पर दर्ज भूमि का कुल क्षेत्रफल 2.4970 हेक्टेयर है।इस भूमि पर इनका परिवार बरसों से खेती करता आ रहा था लेकिन तीन साल पहले जारी एक नक्सली फरमान के चलते उन्हें खेती तो दूर उस ज़मीन पर कदम रखने तक की मनाही कर दी गई थी,और ये फरमान नक्सालियों ने जिस विभाग के अधिकारियों के कहने पर जारी किया उस विभाग का नाम है इंद्रावती टायगर रिजर्व बीजापुर।

दरअसल मामला यह है कि पूरे टायगर रिजर्व एरिया में कहां काम करना है, कब काम करना है और कितना काम करना है यह सब नक्सली निर्धारित करते थे। टायगर रिजर्व के अधिकारियों ने इस इलाके के लिए कैम्पा मद के ए.पी.ओ. वर्ष 2022-23 में नरवा विकास के नाम पर एक कार्य स्वीकृत करवाया जिसकी लागत 56 लाख 81 हज़ार रुपये थी। इस योजना में कुछ तालाबों की खुदाई भी की जानी थी।कैम्पा के डीपीआर के अनुसार पिल्लूर रेंज में  तालाब का जो भौगोलिक निर्देशाँक अर्थात अक्षांश देशांश जिसे जियो टेंगिग कहा जाता है वह  काण्डलापर्ती गांव की मुख्य सड़क से करीब 6 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम दिशा में बीट नंबर 1087 में अवस्थित था।जब वहां काम करवाया जा रहा था तब इस इलाके के तत्कालीन डिप्टी रेंजर शंकर गुरला, बीट गार्ड तलाण्डी शंकर और अतरम सुजीत को वहां मौजूद नक्सालियों ने काम करने से मना कर दिया।तब उन्होंने दूसरे स्थान की खोज शुरू की। इस खोज में उन्होंने पाया कि काण्डलापर्ती के मुख्य वनमार्ग से लगा एक खेत है और उसमे एक डबरी पहले से बनी हुई है। फिर क्या था उन्होंने उसी डबरी में खुदाई करने जेसीबी मंगवा लिया । यह भी उल्लेखनीय है कि यह इलाका इंद्रावती टायगर रिज़र्व के पिल्लूर परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है जहाँ मशीनों से खुदाई करना प्रतिबंधित है। जब इस भूमि की स्वामिनी वीरे बाई ने विरोध जताया तो उस दिन काम रोक दिया गया। कुछ दिनों बाद इन टायगर रिज़र्व के अधिकारी कर्मचारियों के साथ वहाँ के नक्सली नेता पापा राव और कोसा इस महिला के घर आये और उसे धमकाया। नक्सालियों ने कहा कि वन विभाग के लोगों को वे अपना खेत सौंप दें वरना अंजाम भुगतने तैयार रहें। तब इस बेचारी महिला के पास कोई चारा नहीं बचा और उसने अपनी ज़मीन वन विभाग को सौंप दी। वीरे बाई ने बताया कि वहाँ उनसे और उनके परिवार से दस दिनों तक मज़दूरी भी करवाई गयी और मजदूरी के पैसे भी नहीं दिए गए।3000 वर्ग किलोमीटर में फैले इंद्रावती टायगर रिजर्व के अधिकारियों को वन्य प्राणियों के लिए तालाब बनाने के लिए इस गरीब आदिवासी की ज़मीन ही मिली थी जो आज तक उनके कब्ज़े में है।

पीड़िता एसम वीरे बाई की ज़मीन जो वन विभाग के कब्ज़े में है, कांडलापर्ती बीजापुर छत्तीसगढ़.

नक्सली नेता पापा राव और कोसा के साथ मिलकर छीनी ज़मीन

आज से एक साल पहले यदि पीड़ित परिवार से इस बारे में बात की जाती तो निःसंदेह नक्सलियों के डर की वजह से वे कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी है। उन्हें धमकाने वाले दो नक्सली नेताओं में से एक पापा राव ने आत्मसमर्पण कर दिया है और दूसरे नक्सली कोसा को कुछ महीनों पहले  एक मुठभेड़ में सुरक्षा बालों ने मार गिराया है। वीरे बाई और गांव के अन्य लोगों ने हमें स्पष्ट रूप से बिना डरे यह बताया कि इन दोनों नक्सलियों ने टायगर रिज़र्व के डिप्टी रेंजर शंकर गुरला, बीट गार्ड अतरम सुजीत और तलाण्डी शंकर के कहने पर उन्हें धमकाया और सभी ने मिलकर हमारे खेत पर कब्ज़ा कर लिया।

नहीं धमकाया स्वेच्छा से दी गई ज़मीन-डिप्टी रेंजर

जो डिप्टी रेंजर शंकर गुरला यहाँ अर्थात पिल्लूर रेंज में पदस्थ थे वे अब इंद्रावती टायगर रिजर्व के मद्देड़ बफर रेंज में डिप्टी रेंजर के रूप में पदस्थ हैं। इस मामले में जब उनसे बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह वीरे बाई की पट्टे की ज़मीन है।उन्होंने कहा कि इस ज़मीन के लिए उन्होंने नक्सलियों के साथ मिलकर  इस परिवार को नहीं धमकाया था। बल्कि बीरे बाई और उनके परिवार ने स्वेच्छा से यह ज़मीन टायगर रिज़र्व को तालाब बनाने के लिए दी है।जब उनसे यह पुछा गया कि विभाग के दस्तावेज़ों में तालाब किसी और जगह वन विभाग की ज़मीन पर क्यों दर्शाया गया है तो उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था।

मैंने भी किया था विरोध लेकिन वे नहीं माने -सरपंच 

भोपालपटनम तहसील के बड़े काकलेर पंचायत के सरपंच कुम्मा समैया ने बताया कि वीरे बाई की ज़मीन पर जब वन विभाग के अधिकारी तालाब बनवाने आये तो उन्होंने भी इसका विरोध किया था लेकिन वन विभाग के लोगों ने उनकी भी बात नहीं मानी। सरपंच ने यह भी कहा कि वीरे बाई ही नहीं बल्कि कई आदिवासियों की पट्टे की ज़मीन पर उन्हें खेती करने से रोका जा रहा है। इन मामलों को लेकर इस इलाके के युवा बहुत आक्रोशित हैं अगर ऐसा ही रहा तो स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।

 

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