
इंद्रावती टायगर रिजर्व के दुर्लभ बाघों का अस्तित्व खतरे में
बिना अनुमति हो रहा 24 सड़कों और 120 पुलियों का निर्माण
मशीनों से मुरुम और मिट्टी की दिन रात हो रही खुदाई
कोर एरिया में बिना अनुमति जड़ से उखाड़ दिए गए हजारों पेड़
करोड़ों की लकड़ी डिपो पहुँचने से पहले ही हुई गायब
बीजापुर से लौटकर
देवशरण तिवारी

जगदलपुर (हाईवे चैनल ) छत्तीसगढ़ के बीजापुर में इंद्रावती टायगर रिजर्व के अधिकारियों ने एक बड़े दुःसाहस का परिचय दिया है। यहाँ के अधिकारियों ने बिना किसी आदेश के टायगर रिजर्व के अंदर एक दो नहीं कुल 24 सड़कों का निर्माण आरम्भ करवा दिया है।एक दो नहीं कुल 120 पुल पुलियों का निर्माण भी करवाया जा रहा है।कई सड़कें जो पहले से ही वन मार्गों के रूप में मौजूद थीं उनकी चौडाई तीन मीटर से बढ़ा कर साढ़े सात मीटर कर दी गयी है। चौड़ीकारण के लिए सड़क के दोनों किनारों के हज़ारों पेड़ों को जेसीबी (बैकहो लोडर मशीन) से गिरा दिया गया है और सड़क के दोनों ओर करीब छः फिट गहरे और इतने ही चौड़े गड्ढे खोद कर उसी मिट्टी को सड़क पर डाला जा रहा है।टाइगर रिजर्व के कोर इलाकों में जहाँ प्राकृतिक रूप से और लम्बे समय से ग्रामीणों के आने जाने की वजह से जो मार्ग बने हुए थे वहां सड़क को ऊंचा करने के लिए 100 से भी अधिक स्थानों पर मुरुम और मिट्टी की खुदाई मशीनो द्वारा की जा रही है। मुरुम और मिट्टी की खुदाई से पहले उस स्थान पर खड़े सैगोन के साथ अन्य प्रजातियों के विशालकाय वृक्षों को जड़ से उखाड़ कर यहाँ वहां फेंक दिया गया है।लापरवाही इतनी कि पेड़ों की वास्तविक संख्या का हिसाब भी टायगर रिजर्व के अधिकारियों के पास नहीं है जिसके चलते बड़ी मात्रा में तस्करों द्वारा सागौन के गोले अंदर ही अंदर तेलंगाना पहुंचाए जा रहे हैं।कुल मिलाकर इंद्रावती टायगर रिजर्व में वन अफसरों ने इतना उत्पात मचा डाला है कि यहाँ मौजूद उस दुर्लभ वन्य जीवन को ही खतरे में डाल दिया है जिसे बचाने कि इन्हें तनख्वाह दी जा रही है।

हैरानी की बात तो यह है कि यहाँ सड़कों का निर्माण पिछले साल अक्टूबर के महीने से शुरू हुआ है और बीते 2 फरवरी को बीजापुर जिले के ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के कार्यपालन अभियंता ने टायगर रिजर्व के अलग-अलग इलाकों में कुल 117.26 किलोमीटर लम्बी 24 सड़कों के निर्माण की अनुमति के लिए उप निदेशक संदीप बलगा को अनुमति प्रदान करने पत्र लिखा है।

जबकि टायगर रिजर्व में निर्माण की अनुमति के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड से अनुमति प्राप्त करने की एक लम्बी प्रक्रिया से गुज़रना होता है।कार्य शुरू हो जाने की जानकारी उप निदेशक को ना हो ऐसा संभव नहीं है लेकिन उन्होंने भी कागज़ी खानापूर्ती करते हुए इस पत्र को मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीवन)स्टायलो मंडावी को दो दिनों बाद अर्थात 04.02.2026 को प्रेषित किया है।जब मुख्य वन संरक्षक से सड़कों के निर्माण की अनुमति के बारे में पुछा गया तो उन्होंने कहा कि यह अनुमति उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।अर्थात टायगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा उजड़ चुका है लेकिन इसकी वैधानिक अनुमति से सम्बंधित आदेश अभी तक किसी के पास उपलब्ध नहीं है।इंद्रावती टायगर रिजर्व, भैरमगढ़,अभ्यारण्यऔर पामेड़, अभ्यारण्य, के अंतर्गत आने वाले धर्मारम,पुजारी कांकेर, पिल्लूर, पासेवाड़ा, फरसेगढ़ और सेंडरा रेंज में सड़कों का काम दिन रात जारी है। स्ट्रक्चर बनाने जंगल के ही नालों से रेत निकाली जा रही है।

मुरुम और मिट्टी भी रिजर्व के कोर एरिया में दिन रात खोदी जा रही है टायगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो चुका है बाघ सहित कई दुर्लभ जीवों का अस्तित्व खतरे में है।ऐसे में जिस नुक्सान की भरपायी अरबों रूपये से भी नहीं की जा सकती उसकी भरपायी के लिए टायगर रिजर्व के अधिकारी ठेकेदार से जंगल उजाड़ने की सजा के रूप में 25-50 हज़ार रुपये जुर्माने के रूप में वसूल रहे हैं और अपनी कर्तव्य निष्ठा प्रदर्शित कर रहे हैं।इतना सबकुछ तब हो चुका है जब अधिकारियों के पास सड़क बनाने की अनुमति नहीं है।यदि अनुमति होती तो इस खूबसूरत जंगल का क्या हाल होता इस बात का अंदाजा वर्तमान स्थिति को देखकर बखूबी लगाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना
अभी कुछ दिनों पहले 17 नवम्बर 2025 को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड के जिम कार्बेट टायगर रिजर्व में किये जा रहे निर्माण कार्यों को रोकने सम्बन्धी एक याचिका पर सुनवाई के बाद बेहद सख्त आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर.गवई,न्यायाधीश ए. जी. मसीह और ए. एस. चांदुरकार जे.की खंडपीठ ने जिम कॉर्बेट टायगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक, वहां के उप वनसंरक्षक,और रेज अफसरों समेत कुल आठ लोगों पर गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध करने का आदेश पारित किया है।सभी राज्यों को निर्णय तिथि से छः महीने के भीतर सभी टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन को अधिसूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।साथ ही बाघ अभ्यारण्यों के मुख्य और महत्वपूर्ण आवास क्षेत्रों के भीतर सड़कों के चौड़ीकारण, उन्नयन या नये निर्माण पर सख्त प्रतिबन्ध लगाया गया है।परिस्थितिक क्षति और वन्य जीवो के व्यवधान को कम करने के लिए मौजूदा सड़कों को उनके वर्तमान स्वरुप और चौडाई में ही बनाये रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए है।
यहाँ तक कि जो सड़क तारकॉल से बनी है तो उसे तारकॉल की ही स्थिति में रखना होगा। ना तो उसकी सतह को मोटा या चौड़ा करना होगा और ना ही सड़क का विस्तार करना होगा। दूरस्थ स्थानीय गावों तक के सभी मौसमों में उपयोग योग्य पहुँच मार्गों के लिए धातु या पुलिया निर्माण के लिए राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड और नेशनल टाइगर कैंज़र्वेशन अथॉरिटी के साथ केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय कि मंज़ूरी आवश्यक है लेकिन बस्तर के अधिकारियों को ऐसे नियमों और आदेशों का कोई खौफ नहीं है।

दिन रात गूँज रहा तेज़ आवाज़ वाली भारी मशीनों का शोर
टायगर रिजर्व के सायलेंस जोन में शाम से सुबह तक सिर्फ आपतकालीन सेवा जैसे एम्बुलेंस आदि वाहनों की आवाजही को अनुमति दी जाती है और यहां सिर्फ दिन ही नहीं रात में भी जेसीबी डम्पर और रोड रोलर चलाये जा रहे है। जहाँ मोबाईल फोन तक प्रतिबंधित है वहां मोबइल टॉवर खड़े किये जा रहे हैं।इन इलाकों में निर्माण कार्यों से जुड़े श्रमिकों के कैम्प पार्क एरिया से बाहर बनाये जाने के स्पष्ट निर्देश हैं।साथ ही शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक सभी निर्माण कार्य प्रतिबंधित किये गए हैं लेकिन इन दिनों इंद्रावती टायगर रिजर्व के अंदर ही श्रमिकों का डेरा है और दिन रात निर्माण कार्य चालू है।
रिज़र्व फॉरेस्ट की भूमि का बड़े पैमाने पर हो रहा डायवर्ज़न
एक तरफ सरकार का दावा है कि बस्तर अब नक्सल मुक्त हो चूका है लेकिन दूसरी तरफ टाइगर रिजर्व एरिया में खुल रहे सीआरपीएफ के नये नये कैंप और कैम्पो की सुरक्षा में जंगल उजाड़ कर बन रही हैं चौड़ी चौड़ी सड़कें।छत्तीसगढ़ और तेलंगाना बॉर्डर पर स्थिति पामेड़ अभ्यारण के कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर 3535 हेक्टेयर जंगल को उजाड़ कर बन रहे जंगल वार फेयर कॉलेज,अबूझमाड़ के रिजर्व फारेस्ट में वायुसेना के एयर टू ग्राउंड फायरिंग रेंज का निर्माण नये सवाल खड़े कर रहा है।कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि बदलते बस्तर की जो तस्वीर बन रही है वो पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक है।

पीसीसीएफ स्वयं कर चुके हैं इस इलाके का दौरा
यह तस्वीर आज से करीब एक महीना पहले अर्थात 25 अप्रेल 2026 को सुबह 10 बजकर 46 मिनट पर नोट कैम से ली गयी है। यह तस्वीर इंद्रावती टाइगर रिजर्व के पिल्लूर कोर रेंज के उसी सड़क की है जो बिना अनुमति के बनाई जा रही है। इस तस्वीर में प्रदेश के पांच आईएफएस अधिकारी अपने मैदानी अमले के साथ नज़र आ रहे है। इसमें स्वयं प्रदेश के वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव, जगदलपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक अलोक तिवारी, इंद्रावती टायगर रिजर्व के उप निदेशक संदीप बलगा, बीजापुर सामान्य वन मण्डल के वन मण्डलधिकारी रमेश कुमार जांगड़े, दंतेवाड़ा वन मण्डल के वन मण्डलधिकारी रगानाधा रामाकृष्णा वाय और सामाजिक वानिकी वन मण्डल जगदलपुर की वन मण्डलधिकारी शमा फारुकी स्पष्ट नज़र आ रहे हैं। इन सभी ने इन पूरी सड़कों और इसके दोनों तरफ हुए वन विनाश को स्पष्ट रूप से देखा लेकिन इसे रोकने का आदेश नहीं दिया। इससे यह साफ है कि यहां हो रहे वन विनाश की जानकारी सभी को है लेकिन सभी ऊपर से आये मौखिक आदेशों का पालन खुद भी कर रहे हैं और अपने मैदानी अमलों से करवा भी रहे हैं।




