टायगर विहीन हुआ इंद्रावती टायगर रिज़र्व , दो महीनों में पांच बाघों का क़त्ल, ट्रैप कैमरों से दो महीनों का डेटा गायब
रेंजर,डिप्टी रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड निलंबित , उपनिदेशक और अधीक्षक पर विशेष मेहरबानी

देवशरण तिवारी
जगदलपुर (हाईवे चैनल ) | इंद्रावती टायगर रिज़र्व अब टायगर विहीन हो चुका है। इसे इस हाल तक पहुँचाने के लिए ज़िम्मेदार उप निदेशक और अधीक्षक पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है जबकि एक रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और एक फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया गया है। बाघों की पिछली गणना में कुल छः बाघों की मौजूदगी को रिकॉर्ड किया गया था। जिसमे से एक बाघ को पहले ही मारने की कोशिश की गयी थी जिसे घायल अवस्था में जंगल सफारी भेजा जा चुका है और बचे पांच बाघों का शिकार बीते दो महीनों में किया जा चुका है। इस तरह अब यहाँ एक भी बाघ जीवित नहीं बचा है। इनके शिकार में शामिल सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मुख्य सरगना तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। पासेवाड़ा कोर रेंज में पेट्रोलिंग गार्ड का काम करने वाले कुंदन शाह मंडावी ने स्वीकार किया है कि उसने ही इन पांचों बाघों का शिकार किया है। पांच में से दो बाघों की खाल महाराष्ट्र के पुलिस कर्मियों के पास से बरामद की जा चुकी है तथा एक अन्य बाघ की खाल इस पेट्रोलिंग गार्ड के पासेवाड़ा कोर रेंज के अंतर्गत नेतिवाड़ा स्थिति उसके घर से बरामद की गयी है। शेष दो खालों की तलाश की जा रही है।कल पासेवाड़ा कोर रेंज के रेंजर कमल कश्यप, डिप्टी रेंजर नरहरि कश्यप और फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ माझी को निलंबित कर दिया गया है जबकि प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार इंद्रावती टायगर रिज़र्व के उप निदेशक संदीप बलगा और अधीक्षक मनोज बघेल पर होने वाली कार्रवाई का इंतज़ार किया जा रहा है।

शिकारी कर रहे थे ट्रैप कैमरों का इस्तेमाल
शिकारियों के इस संगठित अंतरराज्यीय गिरोह ने योजनाबद्ध तरीके से इस घटना को अंजाम दिया है।इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि टायगर रिज़र्व द्वारा बाघों की निगरानी के लिए जो “कैमरा ट्रेप ” सिस्टम लगाया गया था उसका नियंत्रण भी इसी गिरोह के पास था। इन्हीं कैमरों से वे लगातार इन बाघों पर नज़र रख रहे थे। इस बात की पुष्टि इस बात से हो रही है कि पासेवाड़ा रेंज में लगाए गए कई “कैमरा ट्रैप” से बीते दो माह का डेटा ही डिलीट कर दिया गया है। यह अलग बात है कि डेटा रिकवर हो सकता है लेकिन यह भी बड़ा सवाल है कि इतने लम्बे समय के डेटा का समय समय पर निरीक्षण और विश्लेषण क्यों नहीं किया गया। इन कैमरों के देखरेख की ज़िम्मेदारी पासेवाड़ा कोर रेंज के नेतिवाड़ा इलाके में तैनात फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को दी गयी थी। वन कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी इस फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया गया है। इसके बेहद करीबी साथी एक अन्य फॉरेस्ट गार्ड के भी इस मामले में शामिल होने की सूचना मिली है। इस तरह यह अब स्पष्ट हो चुका है कि टायगर रिज़र्व के ही कर्मचारी ट्रैप कैमरों से बाघों पर नज़र रख रहे थे और बाहरी शिकारियों के साथ घूम घूम कर योजना बद्ध तरीके से एक के बाद एक बाघों का शिकार कर रहे थे।

पासेवाड़ा को छोड़ बाकी परिक्षेत्र एनजीओ के जिम्मे
इंद्रावती टायगर रिज़र्व में वन्य प्राणियों के डेटा संकलन, अध्ययन और अन्य शोध आदि के लिए नोवा नेचर नाम की एक संस्था को ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है। इस काम के लिए उन्हें टायगर रिज़र्व की तरफ से अच्छा खासा भुगतान भी किया जा रहा है, लेकिन इनकी टीम को भी इन शिकारियों की इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रही सक्रियता का आभास नहीं हो सका। नोवा नेचर संस्था के अध्यक्ष एम.सूरज से जब पुछा गया कि जहाँ बाघों का शिकार हुआ वहां के ट्रैप कैमरों का डेटा कैसे डिलीट हो गया तो उन्होंने बताया कि पूरे टायगर रिज़र्व के ट्रैप कैमरों की देखरेख उनकी टीम करती है लेकिन सिर्फ पासेवाड़ा कोर रेंज की ज़िम्मेदारी टायगर रिज़र्व के अधिकारियों के पास है। यह सवाल भी उठ रहा है कि सिर्फ पासेवाड़ा कोर के ट्रैप कैमरों के नियंत्रण की ज़िम्मेदारी इस एनजीओ को ना देकर टायगर रिज़र्व के कर्मचारियों ने अपने पास क्यों रखी थी । अब इसे इत्तेफाक कहें या षड़यंत्र कि जिस स्थान पर एनजीओ को काम करने से रोका गया उसी इलाके में पांच बाघों का क़त्ल हुआ। शिकारी कुंदन का घर भी यहीं है । एक बाघ की खाल यहीं से बरामद हुई और जिन ट्रैप कैमरों का डेटा डिलीट किया गया वो भी यहीं लगाए गए थे।





